Wednesday, April 14, 2010

माँ की आँखें गीली-गीली



बच्चों के इशारे पेट तरफ़
 
मजदूर चले फिर सेठ तरफ़

 
तसले में उम्मीद पकाओ
 
मत देखो सूखे खेत तरफ़

 
प्यार की राहें और भी थीं
 
क्यूँ आये तुम रेत तरफ़

 
माँ की आँखें गीलीं-गीलीं
 
चले जो हम परदेस तरफ़

 
सारी दुनिया दुश्मन अपनी
 
हम-तुम दोनों एक तरफ़

 
मयख़ाने में जश्‍न मनेगा
 
उठा तू अँगुली शेख़ तरफ़

 
चाँद की सूरत बिकने वाली
 
हम भी देखें जेब तरफ़

 
नंगेपन को मत ले आना
 
आना जब इस देस तरफ़

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