Tuesday, June 8, 2010

तुम तूफान समझ पाओगे ?


तुम तूफान समझ पाओगे ?

 

गीले बादल, पीले रजकण,
 

सूखे पत्ते, रूखे तृण घन
 

लेकर चलता करता 'हरहर'--इसका गान समझ पाओगे?
 

तुम तूफान समझ पाओगे ?


 

गंध-भरा यह मंद पवन था,
 

लहराता इससे मधुवन था,
 

सहसा इसका टूट गया जो स्वप्न महान, समझ पाओगे?
 

तुम तूफान समझ पाओगे ?


 

तोड़-मरोड़ विटप-लतिकाएँ,
 

नोच-खसोट कुसुम-कलिकाएँ,
 

जाता है अज्ञात दिशा को ! हटो विहंगम, उड़ जाओगे !
 

तुम तूफान समझ पाओगे ?


 

- हरिवंशराय बच्चन

Tuesday, June 1, 2010

डॉ. राहत इन्दौरी





तूफानों  से  आंख  मिलाऊँ , सैलाबों  पे  वार  करूं...

मल्लाहों  का  चक्कर  छोडू तैर  के   दरिया  पार  करू...

 
फूलों  की  दुकाने  खोलो खुशबू का  ब्यापार  करू...
 
इश्क  खता  है  तो  ये  खता,  एक  बार  नहीं  सौ  बार  करूं.


-राहत इन्दौरी

Monday, May 31, 2010

सरस्वती वंदना

" वीणा वादिनी वर दे ।
 

प्रिय स्वतंत्र रव , अमृत मंत्र नव ,
 

भारत में भर दे , वर दे ।
 

वीणा वादिनी वर दे ॥

 


काट अंध उर के बंधन स्तर ,
 

बहा जननि ! ज्योतिर्मय निर्झर
 

कलुष भेद , तम हर , प्रकाश भर
 

जगमग जग कर दे ।
 

वीणा वादिनी वर दे ॥

 

नव गति , नव लय , ताल छंद नव ,
 

नवल कंठ , नव जलद , मंद्र रव
 

नव नभ के नव विहग वृन्द को
 

नव पर , नव स्वर दे , वर दे
 

वीणा वादिनी वर दे ॥ "