Tuesday, April 13, 2010

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार
 
 आज सिन्धु ने विष उगला है
 
लहरों का यौवन मचला है
 
आज ह्रदय में और सिन्धु में
 
साथ उठा है ज्वार

 
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

 
लहरों के स्वर में कुछ बोलो
 
इस अंधड में साहस तोलो
 
कभी-कभी मिलता जीवन में
 
तूफानों का प्यार

 
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

 
यह असीम, निज सीमा जाने
 
सागर भी तो यह पहचाने
 
मिट्टी के पुतले मानव ने
 
कभी ना मानी हार

 
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

 
सागर की अपनी क्षमता है
 
पर माँझी भी कब थकता है
 
जब तक साँसों में स्पन्दन है
 
उसका हाथ नहीं रुकता है
 
इसके ही बल पर कर डाले
 
सातों सागर पार

 
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार ।।

Sunday, April 11, 2010

हमेशा गाँव ही खुद को शहर में ढाल लेते हैं

गरीबी में भी बच्चे यूँ उड़ाने पाल लेते हैं

ज़रा सी डाल झुक जाए तो झूला डाल लेते हैं

 
जहाँ में लोग जो ईमान की फसलों पे जिंदा हैं
 
बड़ी मुश्किल से दो वक्तों की रोटी दाल लेते हैं

 
शहर ने आज तक भी गाँव से जीना नहीं सीखा
 
हमेशा गाँव ही खुद को शहर में ढाल लेते हैं

 
परिंदों को मोहब्बत के कफस में कैद कर लीजे
 
न जाने लोग उनके वास्ते क्यों जाल लेते हैं

 
अभी नज़रों में वो बरसों पुराना ख्वाब रक्खा है
 
कोई भी कीमती सी चीज़ हो संभाल लेते हैं

 
ये मुमकिन है खुदा को याद करना भूल जाते हों
 
तुम्हारा नाम लेकिन हर घडी हर हाल लेते हैं

 
हमें दे दो हमारी ज़िन्दगी के वो पुराने दिन
 
'रवि' हम तो अभी तक भी पुराना माल लेते हैं

Wednesday, April 7, 2010

हिंदी वादी

मेरा बचपन हिंदी में है, उसे अंग्रेजी-उर्दू संवाद नहीं आता,
 

माँ की लोरी, थपकी का मुझको अनुवाद नहीं आता |

मुझसे क्यूँ चाहती हो अदब विलायती या लखनवी,
 
छोटे शहर के लड़कों को देना दाद नहीं आता |

 
अशिक्षित हूँ, फ्रेंच, बंगाली, मराठी, तमिल, हिब्रू में,
 
मेरी कमी है कि मुझे इनमें करना विवाद नहीं आता |

 
लिखता, कहता हूँ कई आधी, सीखी जुबानों में,
 
पर विवशता है, परदेसी परोसी में वो स्वाद नहीं आता |

 
तुम जाओ जिस राह जाना चाहो, मेरा सुख मेरी मिट्टी में है,
 
मेरी सृष्टि है मेरी जन्मभूमि, मुझे बनना अपवाद नहीं आता |

 
भुला-सा दिया है तुमने इस विवेक को, कह मेरी सोच पुरानी है,
 
सहस्त्रों वर्षों की संस्कृति का मुझको करना त्याग नहीं आता |